तब मन गंगाजल होता है

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तब मन गंगाजल होता है
जब प्रेम हृदय को छूता है
विश्वास विलम सम भावों का,
होता एक बसेरा है ।

कितने सिंहासन छोड़ चुके हैं,
कितने सिंहासन डोल चुके हैं,
कितने जहर के प्याले पी गए,
कितने हंसके फासी बढ़ गए ॥

जो प्रेम के खातिर दुनियाँ तजता,
जीवन हवन रचाती है,
वो मीरा तुलसी होता है ।

ज्ञान का प्रेम विवेक जगाए,
गीता, कविता वेद रचाए,
सीेच यमझ के क्षितिज बनाए,
नित जीवन त्यौहार मनाए

जो ज्ञान का दीपक होता है
और सदियों उजाला करता है
वो गांँधी कबिरा होता है

कुछ देश धरम पर प्यार लुटाएँ
जन जीवन में प्राण जगाएँ
मानवता का पाठ पढ़ाएें
नवजीवन संदेश सुनायें

जो पीड़ा हरता सूली चढ़ता
और छाती पर गोली खाता है
वो ईसा गाँधी होता है ॥

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