रायपुर, 08 अक्टूबर 2009 - खरीफ मौसम में मानसून की देरी और कम बारिश के कारण खाली रहे खेतों में पिछले दिनों हुई बारिश से नमी का स्तर रबी मौसम में लगाई जाने वाली फसलों के लिए उपयुक्त है। इसी लिए इस संचित नमी का उपयोग करने किसानों को रबी की दलहन और तिलहन फसलों को ऐसे खेतों में बोने की सलाह राज्य के कृषि विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों द्वारा दी गई है।
अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है कि वे रामतिल, अलसी, तोरिया, मटर, धनियाँ, कुल्थी, चना, मसूर, कुसुम आदि फसलों के बीजों की बुआई कतारों में ट्रेक्टर चालित सीड कम फर्टिलाईजर ड्रिल से या हल के पीछे कूड़ में खाद एवं बीज डालने वाले बोआई यंत्र से करें। असिंचित क्षेत्रों में तोरिया की जे.टी.-1, पी.टी.-303, टी-9, रामतिल की जे.एन.सी.-6, जे.एन.सी.-9, अलसी की कार्तिका, शीतल, जे.एल. 23-10, जवाहर-23, मटर की अम्बिका, रचना, अर्पणा, चना की जे.जी.-15, विजय, वैभव और कुल्थी विरषा-1 किस्मे लगाने का सुझाव भी विशेषज्ञों ने दिया है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने प्रदेश के किसानों को रबी मौसम में लगने वाली रामतिल फसल में प्रति एकड़ 20 किलोग्राम डी.ए.पी., 25 किलोग्राम यूरिया, तोरिया में 40 किलोग्राम डी.ए.पी. एवं 35 किलोग्राम यूरिया, अलसी में 30 किलोग्राम डी.ए.पी. एवं 30 किलोग्राम यूरिया, मटर एवं चना में 1 बोरी डी.ए.पी. प्रति एकड़ उपयोग करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों ने डी.ए.पी. रासायनिक खाद, बीजों की बोआई के समय देने एवं यूरिया की टॉप ड्रेसिंग सिंचाई की व्यवस्था होने या नमी के रहने पर एक या दो बार करने का सलाह दी है।
कृषि अधिकारियों ने वर्तमान मौसम को देखते हुए धान की फसल में झुलसा एवं तना छेदक कीट के प्रकोप की आशंका भी व्यक्त की है। उन्होंने झुलसा रोग के प्रकोप पर फसल में यूरिया की टॉप ड्रेसिंग बंद करने तथा रोगनाशक दवा बीम या एक्टीनो 120 ग्राम प्रति एकड़ या ट्राईसाईक्लोजोल 1 मिलीलीटर दवा प्रति लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करने की सलाह दी है। तना छेदक कीट के लिये फेम दवा 2 मिलीलीटर प्रति दस लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की भी सलाह दी है। विशेषज्ञों ने सब्जी वाली फसल बैंगन, टमाटर, फूलगोभी, पत्तागोभी, मिर्ची की पौध तैयार करने का उपयुक्त समय बताया है। नर्सरी में बीज डालने के पहले बीज उपचार डेढ़ ग्राम कार्बान्डाजीन तथा डेढ़ ग्राम डायथेम एम-45 दवा से प्रति किलो बीज उपचारित कर बुवाई करने तथा इन्हीं दवाओं का घोल बनाकर एक सप्ताह के अन्तर से पौध गलन-ब्लाईट रोग से बचाव के लिये छिड़काव करने की सलाह दी है। किसान पत्ती मोड़क कीट की रोकथाम के लिए कोन्फीडोर अथवा रिमोन दवा 5 मिलीग्राम या फेम दवा 2 मिलीग्राम स्प्रेयर के एक टंकी पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव कर सकते हैं।
तेरिया की फसल में आरा मक्खी के नियंत्रण के लिये रोगर अथवा फेम अथवा रिमोन दवा का छिड़काव करें। कद्दू वर्गीय फसलों में लाल कीट के नियंत्रण के लिए कार्बोरिल दवा का छिड़काव सुबह या शाम के समय किया जाना चाहिए।
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