क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण निधि

मुख्यमंत्री की विशेष पहल पर केन्द्र सरकार से राज्य को जल्द मिलेंगे 130 करोड़ रूपए

क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण निधि में जमा राशि मिलने का रास्ता खुला

छत्तीसगढ़ में भी गठित किया जाएगा 'केम्पा'

रायपुर, 17 जुलाई 2009 - छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की विशेष पहल पर राज्य सरकार को केन्द्र से विभिन्न विकास प्रकल्पों के लिए क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण निधि में से 130 करोड़ रूपए जल्द मिलने वाले हैं। यह राज्य सरकार की तेरह सौ करोड़ रूपए की उस राशि का दसवां हिस्सा होगा, जो पिछले सात वर्षों से केन्द्र के पास जमा है। मुख्यमंत्री की पहल के फलस्वरूप अब राज्य को यह राशि मिलने का रास्ता खुल गया है।

डॉ. रमन सिंह ने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री जयराम रमेश को भी धन्यवाद दिया है। केन्द्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप छत्तीसगढ़ में भी बहुत जल्द क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (केम्पा) का गठन किया जाएगा, जिसकी गवर्निंग कमेटी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होगी।

राज्य सरकार के अधिकारियों ने आज यहां मंत्रालय में बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण की जमा राशि के विषय में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को इस महीने की 10 तारीख को एक पत्र भेज कर उनसे सुप्रीम कोर्ट के अन्तरिम निर्णय के अनुरूप इस राशि का दस प्रतिशत हिस्सा छत्तीसगढ़ को जल्द उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। मुख्यमंत्री के पत्र पर प्रधानमंत्री के स्तर पर दिए गए निर्देशों के बाद केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री जयराम रमेश ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छत्तीसगढ़ के लिए इस निधि में से 130 करोड़ रूपए राज्य सरकार को आवंटित करने निर्देश जारी कर दिए हैं। इससे राज्य के वन क्षेत्रों में केन्द्रीय वन संरक्षण अधिनियम 1980 के प्रावधानों के तहत मंजूर हो चुके विभिन्न विकास प्रकल्पों को आगे बढ़ाने का मार्ग आसान हो गया है। इस राशि से राज्य की वनों की सुरक्षा के साथ वन प्रबंधन और वनों के विकास तथा अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों के बेहतर प्रबंधन में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा जिन परियोजनाओं में वैकल्पिक वृक्षारोपण बाकी रह गया है, वहां तेजी से वृक्षारोपण किया जा सकेगा। इस राशि का उपयोग वन अनुसंधान, और संयुक्त वन प्रबंधन समितियों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकेंगे। इन समितियों के माध्यम से वनवासियों को विभिन्न रोजगार मूलक कार्यों से भी जोड़ा जा सकेगा। अत्यधिक जैविक दबाव बढ़ने के कारण राज्य के लगभग एक तिहाई जंगल बिगड़े वनों की श्रेणी में आ गए हैं, जिन्हें सुधारने का कार्य भी अब तेजी से होगा।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद विभिन्न विभागों की 164 विकास परियोजनाओं के प्रस्तावों को केन्द्रीय वन संरक्षण अधिनियम 1980 के प्रावधानों के तहत केन्द्र सरकार द्वारा मंजूरी दी गई थी। इसके अन्तर्गत लगभग साढ़े बारह हजार हेक्टेयर जमीन विकास कार्यों के लिए संबंधित विभागों को आवंटित की जा चुकी है, जिनमें मुख्य रूप से जल संसाधन, ऊर्जा और लोक निर्माण विभाग सहित दक्षिण पूर्वी कोयला प्रक्षेत्र लिमिटेड (एस.ई.सी.एल.) के प्रस्ताव भी शामिल हैं। राज्य सरकार के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि केन्द्रीय वन संरक्षण अधिनियम के तहत किसी भी विकास परियोजना के लिए संबंधित विभागों और एजेंसियों को प्राप्त वन भूमि के बदले उन विभागों और एजेंसियों को वैकल्पिक वृक्षारोपण और वन भूमि के प्रत्याशा मूल्य की राशि वन विभाग को देनी होती है। छत्तीसगढ़ इन प्रकरणों में लगभग एक हजार 300 करोड़ रूपए की यह धनराशि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तारतम्य में पिछले सात वर्षों से भारत सरकार के पास जमा थी।

अधिकारियों ने बताया कि इस सिलसिले में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इस महीने की दस तारीख को प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को पत्र भेज कर यह अनुरोध किया था कि केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में जमा राज्य की यह राशि छत्तीसगढ़ सरकार को वापस की जाए, जिससे राज्य में वनों का विकास किया जा सके। ज्ञातव्य है कि इसके पहले इस संबंध में केन्द्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में एक शपथ पत्र प्रस्तुत कर राज्य सरकारों के स्तर पर ही क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (केम्पा) का गठन राज्य सरकारों के स्तर पर ही करने की पेशकश करते हुए यह आग्रह किया था कि वनों के विकास के लिए धनराशि राज्य सरकारों को दी जाए। इसी तारतम्य में सुप्रीम कोर्ट ने एक अंतरिम निर्णय में यह निर्देश जारी किए हैं कि देश की प्रत्येक राज्य सरकार से प्राप्त धनराशि का दस प्रतिशत संबंधित राज्य को उसके वनों के विकास के लिए उपलब्ध कराया जाए।

डॉ. मनमोहन सिंह को भेजे गए पत्र में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने उन्हें उनके प्रधान सचिव श्री टी.के. नायर द्वारा इस वर्ष 30 मार्च को ली गई राज्यों की मुख्य सचिवों की बैठक का भी उल्लेख किया और उन्हें यह जानकारी दी कि इस बैठक में यह तय किया गया था कि केन्द्रीय वन संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के पालन के लिए राज्यों की ओर से केन्द्र सरकार के प्राधिकरण (केम्पा) में जमा की गई राशि संबंधित राज्यों को सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के अनुरूप वापस की जाए। अधिकारियों ने बताया कि केन्द्र सरकार के निर्देश पर अब छत्तीसगढ़ में भी अब राज्य स्तरीय 'केम्पा' का गठन किया जा रहा है। इसकी गवर्निग कमेटी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में और स्टीयरिंग कमेटी मुख्य सचिव की अध्यक्षता में तथा कार्यकारी समिति प्रधान मुख्य वन संरक्षक की अध्यक्षता में गठित की जाएगी। केन्द्र से यह धनराशि प्राप्त होते ही राज्य में वन विकास के विभिन्न कार्यों में उसका उपयोग शुरू कर दिया जाएगा।

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