कुपोषण जन जागरण अभियान

राज्य में सुपोषण मेलों की तैयारी
दत्तक पुत्री शिक्षा योजना के लिए भी चलेगा सहयोग अभियान
महिला एवं बाल विकास मंत्री ने ली समीक्षा बैठक

रायपुर, 31 जुलाई 2009 - कुपोषण के खिलाफ और भी ज्यादा व्यापक जन-जागरण के लिए छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में सुपोषण मेलों आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह आगामी आठ अगस्त को राजनांदगांव में जिला स्तरीय सुपोषण-मेले का शुभारंभ करेंगे। मेलों का आयोजन प्रथम चरण में जिला स्तर पर जिला मुख्यालय में और द्वितीय चरण में विकासखण्ड मुख्यालय में किए जाएंगे। इसी तरह आगामी 13 अगस्त को दत्तक पुत्री शिक्षा योजना के तहत सहयोग अभियान भी प्रदेश भर में चलाया जाएगा।

यह जानकारी महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री लता उसेण्डी की अध्यक्षता में आयोजित विभाग के जिला अधिकारियों की समीक्षा बैठक में दी गई। सुश्री लता उसेण्डी ने बैठक में इन दोनों आयोजनों के लिए स्थल चयन सहित अन्य सभी जरूरी तैयारियां करने के निर्देश दिए। बैठक में विभाग के सचिव श्री एस.के.बेहार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

महिला और बाल विकास संचालनालय में आयोजित बैठक में सुश्री उसेण्डी ने कहा कि विगत 6 जून को आयोजित कुपोषण मुक्ति रैलियों के 'फॉलो-अप' के लिए राजनांदगांव से सुपोषण मेलों का प्रारंभ किया जा रहा है।

इस मेले में बच्चों का वजन लेने ग्रोथ मॉनिटरिंग, कुपोषित की श्रेणी की पहचान, शिशु रक्षा कार्ड बनाने और गंभीर कुपोषित बच्चों को शिशु रोग विशेषज्ञों से परीक्षण कराने की व्यवस्था अच्छी तरह कर लें। साथ ही दवाओं के वितरण बच्चों के माता-पिता और गोद लेने वाले व्यक्तियों को पोषण आहार विशेषज्ञों के द्वारा कुपोषण की जानकारी देने और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री से पौष्टिक व्यंजन बनाने की विधि बताने सहित मेले में की जाने वाली अन्य गतिविधियों की तैयारियां सुनियोजित तरीके से कर लें ताकि आयोजन में किसी प्रकार की कमी ना रहे। इसी प्रकार 13 अगस्त को पूरे प्रदेश में आयोजित दत्तक पुत्री शिक्षा योजना सहयोग अभियान के लिए पुख्ता इंतजाम करें। कार्यक्रम आयोजन की तैयारी में बिल्कुल कोताही न बरतें। उन्होंने कहा कि पिछली 6 जून को विभागीय अमले की सक्रियता से ही पूरे प्रदेश में कुपोषण मुक्ति रैली का सफल आयोजन किया गया था। जिसमें समाज के हर तबके के लोगों ने अपनी सक्रिय भागीदारी निभायी। इसी तरह आगामी 8 और 13 अगस्त को आयोजित कार्यक्रमों के सफल आयोजन के लिए इस अभियान में उद्योगपतियों, व्यवसायीगण, चेम्बर के पदाधिकारियों सहित समाज के सभी वर्गों को शामिल करें ताकि योजना का लाभ अधिक से अधिक बालिकाओं को दिलाया जा सके। समाज के सभी वर्गों को अभियान में शामिल करने से बालिका शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ प्रदेश का शैक्षिक स्तर भी ऊंचा उठेगा। दत्तक पुत्री शिक्षा योजना के तहत दी जाने वाली सामग्रियों में बस्ता को आवश्यक रूप से शामिल करें, ताकि बालिकाएं अपने अन्य शैक्षिक सामग्रियों को बस्ते में सुरक्षित रख सकें। जिला स्तर के कार्यक्रम में क्षेत्र के मंत्री, सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, महापौर और अन्य जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करें। इसी तरह परियोजना स्तर पर क्षेत्र के विधायक, अध्यक्ष, नगर पंचायत तथा ग्राम पंचायत अध्यक्ष, जनपद सदस्य, सरपंच-पंच सहित दत्तक बालिकाओं के माता-पिता, दत्तक अभिभावक, पंचायतीराज संस्थाओं और नगरीय निकायों के प्रतिनिधियों, नागरिकों तथा छात्र-छात्राओं को आमंत्रित करें।

उल्लेखनीय है कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने और उनके सहयोग के लिए वातावरण निर्मित करने के लिए 13 अगस्त को दत्तक पुत्री शिक्षा योजना के मापदण्डों के अनुरूप चयनित दो लाख से अधिक बालिकाओं को बस्ता, टिफिन और कम्पास बॉक्स, स्लेट, पेंसिल, जूते-मोजे सहित अन्य शैक्षिक सामग्रियों का सेट दिया जाएगा। योजना के तहत प्राथमिक शाला में अध्ययनरत गरीब बालिकाओं के लिए तीन सौ रूपए और माध्यमिक शाला में अध्ययनरत गरीब बालिकाओं को चार सौ रूपए देने का प्रावधान है। बैठक में सुश्री लता उसेण्डी ने 13 अगस्त से प्रारंभ होने वाले धनलक्ष्मी योजना और शक्ति स्वरूपा योजना की तैयारी की भी समीक्षा की। धनलक्ष्मी योजना के अंतर्गत पर सभी वर्ग के हितग्राहियों को आमंत्रित कर बैंक पास बुक का वितरण किया जाएगा। शक्ति स्वरूपा योजना को राज्य के आदिवासी बहुल चार जिलों नारायणपुर, बस्तर (जगदलपुर), दंतेवाड़ा और बीजापुर में प्रारंभ करने की स्वीकृति दी गई है। योजना के तहत हितग्राहियों को आयोजन स्थल पर चेक बुक और पास बुक का वितरण किया जाएगा।

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