ऊर्जा विभाग समीक्षा बैठक

निर्माणाधीन ताप बिजली परियोजनाएं समय पर पूरी की जाए : मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह

रायपुर, 30 जून 2009 - छत्‍तीसगढ़ मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज यहां मंत्रालय में ऊर्जा विभाग के काम-काज की समीक्षा करते हुए प्रदेश की विद्युत व्यवस्था और निर्माणाधीन ताप बिजली परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने सभी निर्माणाधीन कार्यों को निर्धारित समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। डॉ. सिंह ने निम्न गुणवत्ता के ट्रांसफार्मरों की प्राप्त शिकायतों के संबंध में निर्देश दिए कि आपूर्तिकर्ता फर्मों के विरूध्द कड़ी कार्रवाई की जाए।

प्रत्येक ट्रांसफार्मर का परीक्षण कर मापदण्डों के अनुरूप न होने पर कम्पनी द्वारा इन्हें अगले छह माह में योजना बनाकर बदलने की कार्रवाई कराई जाए। उक्त निर्देश मुख्यमंत्री ने आज यहां मंत्रालय में ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में छत्‍तीसगढ़ मुख्य सचिव श्री पी.जॉय उम्मेन और प्रमुख सचिव ऊर्जा श्री डी. एस. मिश्रा, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री एन.बैजेन्द्र कुमार तथा छत्‍तीसगढ़ विद्युत कम्पनियों प्रबंध निदेशक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने किसानों को नि:शुल्क पम्प सुविधा योजना के संबंध में निर्देश दिए कि बिजली की खपत के लिए प्रस्तावित 150 यूनिट प्रतिमाह प्रति हार्स पॉवर की सीमा का आंकलन प्रत्येक 6 माह के कालखण्ड में होना चाहिए। ऐसा करने पर कृषकों को 6 माह की अवधि में 5 हार्स पॉवर के पम्प हेतु अधिक विद्युत खपत करने की सुविधा मिलेगी। अत: इस प्रकार के आंकलन करने पर कृषकों को नि:शुल्क सुविधा की योजना लागू करने में व्यवहारिक सुविधा रहेगी। उन्हाेंने मीटरों के संबंध में निर्देश दिए कि विद्युत कम्पनी को स्वयं की प्रयोगशाला बनाकर गुणवत्ता के अनुरूप मीटर खरीदने चाहिए। प्रमुख सचिव श्री डी.एस.मिश्रा ने बताया कि कृषि पम्पों में शत-प्रतिशत मीटर की स्थापना जुलाई 2009 तक कर ली जाएगी। एकल बत्ती कनेक्शन में भी सितम्बर 2009 तक शत-प्रतिशत मीटर लगा दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि मार्च 2010 तक विद्युत प्रणाली में तकनीकी और वाणिज्यिक हानि के स्तर को बीस प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य दिया गया है और इसे अनिवार्यत: पूरा किया जाएगा।

प्रबंध निदेशक, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी ने बताया कि वर्ष 2012 के अंत तक कोरबा पश्चिम में प्रस्तावित 500 मेगावाट क्षमता की विस्तार इकाई एवं जांजगीर-चाम्पा जिले में प्रस्तावित 1000 मेगावाट क्षमता की परियोजना अंतर्गत 500 मेगावाट की पहली इकाई से विद्युत का उत्पादन प्रारंभ हो जाएगा। निजी क्षेत्र एवं केन्द्रीय सेक्टर से मिलने वाली बिजली को सम्मिलित करने पर वर्ष 2012 तक 5000 मेगावाट से अधिक बिजली की उपलब्धता हो जाएगी। मुख्यमंत्री द्वारा निर्देश दिए गए कि 2012 तक तैयार होने वाले सभी उत्पादन परियोजनाओं की सतत समीक्षा की जाए, ताकि राज्य में मांग के अनुरूप विद्युत की उपलब्धता बनी रहे। प्रबंध निदेशक, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी ने बताया कि राज्य में उपलब्ध होने वाली अतिरिक्त 5000 मेगावाट बिजली के उपयोग हेतु पारेषण प्रणाली के विकास के लिए पर्याप्त क्षमता की लाईनें बनायी जा रही हैं। प्रमुख सचिव, ऊर्जा द्वारा अवगत कराया गया कि विभाग ने सभी प्रस्तावित लाईनों की योजना की समीक्षा कर ली है तथा पारेषण कंपनी को सतत समीक्षा करने के लिए कहा गया है, ताकि उपलब्ध बिजली के अनुरूप पारेषण प्रणाली की क्षमता उपलब्ध हो जाए एवं किसी भी अवस्था में उत्पादन संयंत्रों को बंद न होना पड़े। निदेशक सी.बी.डी.ए. ने जानकारी दी कि राज्य में रतनजोत के बीजों का विक्रय खुले बाजार में अधिक दर में होने के कारण सी.बी.डी.ए. को बीज उपलब्ध नहीं हो रहा है। कृषकों को बाजार में अधिक मूल्य प्राप्त होने के कारण सी.बी.डी.ए. पर्याप्त मात्रा में बायोडीजल का उत्पादन नहीं कर पा रहा है। इंडियन आयल कार्पोरेशन व हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन के साथ सम्पादित एम.ओ.यू. के पालन में भूमि की उपलब्धता कराई जा रही है एवं निकट भविष्य में रतनजोत के बीज के पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होंगे व बायोडीजल का उत्पादन भी बढ़ेगा। मुख्य सचिव द्वारा यह निर्देश दिए गए कि बायोडीजल के विक्रय हेतु राजधानी के जेल के सामने स्थापित पेट्रोल पंप पर पृथक से बायोफ्यूल मिश्रित डीजल का विक्रय चालू किया जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राज्य में सड़क बत्ती के अंतर्गत बिजली के खपत को कम करने की अपार संभावनाएं हैं। इसे राज्य के सभी जिलों में लागू किया जाए। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस थाना घरों, शासकीय भवनों एवं नई राजधानी क्षेत्र में सोलर आधारित सड़क बत्ती लगाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी कंपनियां अपनी योजनाओं को लागू करने के लिए पृथक से निगरानी सेल का गठन करें एवं उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देने के लिए आपसी समन्वय स्थापित कर कार्य करें। बैठक में राज्य की विद्युत कंपनियों के प्रबंध निदेशक उपस्थित थे।

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