आज सुखद संयोग है कि आयुर्वेद प्रवर्तक भगवान धन्वंतरी के जंयती अवसर पर प्रदेष के आयुर्वेद स्नातक मुख्यमंत्री का जन्म दिवस मनाया जा रहा है। सौम्य, शाालीन, सजीले व्यक्तित्व के धनी डॉ. रमन सिंह राज्य के शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय रायपुर के छात्र रहे हैं, राजनीति के इस निर्विवाद, मँजे हुए व्यक्तित्व पर महाविद्यालय को गर्व है
महाविद्यालय का हर सदस्य जब भी उनसे मिलता है, अत्यंत भावविभोर हो जाता है, उनके मानस पटल पर आज भी कालेज के मनी कैंटीन की चाय-समोसा, मिश्रा पान ठेले की मीठी पत्ती, सहपाठियों के साथ की गई चुहलबाजी एवं व्हालीबाल, क्रिक्रेट तथा बैडमेंटन की शाॉट अंकित है, मुख्यमंत्री भी आपने सहपाठियों एवं आयुर्वेद स्नातकों के प्रति आत्मीयता एवं निष्छल प्रेम प्रदर्षित करते है।
मैं अपने लेखनी के माध्यम से उनके महाविद्यालयीन सस्मरणों एवं मातृसंस्था के प्रति दृष्टिकोण को रेखांकित करने का प्रयास करूंगा, 25, 26 एवं 27 मार्च 2006 को संपन्न महाविद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह का गरिमामय एवं भव्य आयोजन डॉ. रमनसिंह के अपार सहयोग एवं मार्गदर्षन से ही संभव हो पाया इस आयोजन ने महाविद्यालय को पूरे देष में पहचान दी।
स्वर्ण जयंती समारोह समिति के जनसंपर्क एवं प्रेस प्रभारी के रूप में मेरे द्वारा जब उनसे स्वर्ण जयंती स्मारिका हेतु साक्षात्कार के लिए आग्रह किया गया तो उन्होनें विधान सभा के बजट सत्र की व्यस्तता के बावजूद आग्रह को स्वीकार करते हुए अपने संस्मरण एवं महाविद्यालय तथा आयुर्वेद विकास के योजनाओं के संबंध में अभिव्यक्ति दी, जिसे संकलित कर स्मारिका में प्रकाषित किया गया, साक्षात्कार के दौरान जब उनसे अध्ययन काल के दौरान महाविद्यालयीन छात्र राजनीति में उनके सक्रियता के बारे में प्रष्न किया गया तो उन्होंने बिना लागलपेट के बताया कि छात्र जीवन में उनकी रूचि न तो दलीय राजनीति मेें थी और न ही छात्र राजनीति में, बल्कि वे राजनीति के दलदल से कोसो दूर थे उन्होंने बताया कि आयुर्वेद कालेज के छात्र जीवन में उनका प्रिय मित्र डॉ. प्रकाष शाुक्ला था, जो कि मेरा सहपाठी था, डॉ. प्रकाष ही छात्र संघ का चुनाव में शाामिल होता था मैं उसका सर्मथक था। प्रकाष शाुक्ला जब विष्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के अध्यक्ष पद का प्रत्याषी था, तब उस दौरान हम सहपाठियों न अपनी-अपनी कलाई घड़ियां गिरवी रखकर उनके चुनाव फंड की व्यवस्था की थी, इस चुनाव में प्रकाष शाुक्ला अध्यक्ष निर्वाचित हुआ, उन्होने बताया कि उक्त दौर में छात्रराजनीति अपने षिखर पर थी, उस दौर के छात्र नेता सैध्दांतिक एवं छात्र हितों पर सदैव सजग रहते थे, उस समय दलीय राजनीति की घुसपैठ छात्र राजनीति में नही थी, उन्होंने बताया कि उस दौर में छत्तीसगढ़ के एक मात्र रविषंकर शुक्ल विष्वविद्यालय रायपुर के विष्वविद्यालयीन छात्र राजनीति का केन्द्र आयुर्वेद महाविद्यालय का मनी केंटीन एवं छात्रावास हुआ करता था, जहाँ तमाम तरह की राजनीतिक दांव पेंच एवं उठा पटक को अंजाम दिया जाता था, मै इस रणनीति का केवल एक मूक दर्षक ही हुआ करता था, क्योंकि मेरी रूचि कभी राजनीतिक दांव पेंच में नही थी। उन्होंने बताया कि महाविद्यालयीन जीवन में उनकी रूचि, क्रिकेट, व्हालीबॉल एवं बैडमिंटन में थी, तथा यह मेरे प्रतिदिन की दिनचर्या में शाामिल थी, डॉ. रमन सिंह को आज भी मनी केंटीन के चाय-समोसा तथा मिश्रा पान ठेले की मीठी पत्ती की तलब याद है, वे बताते है कि ये दोनों ठेले भी हमारे दैनंदिनी में शाामिल थे, वे यह भी बताने में कोई संकोच नहीं करते की शाायद आजभी इन ठेलों में उनकी उधारी बाकी होगी।
डॉ. रमन ंसिंह का आयुर्वेद महाविद्यालय एवं आयुर्वेद चिकित्सा पध्दति के विकास के प्रति जागरूक दृष्टिकोण सदैव दृष्टिगोचर होता है, जब वे विधायक, साँसद एवं केन्द्रीय मंत्री रहे तब उन्होंने विभिन्न मंचों में आयुर्वेद महाविद्यालय रायपुर को विष्वविद्यालय को दर्जा प्रदान करने की इच्छा व्यक्त की। रमन सरकार ने आयुर्वेद महाविद्यालय को मॉडल कालेज के रूप में उन्नयन किया। आयुर्वेद के विकास एवं शाोध में प्रयत्नषील रहने वाले आयुर्वेदज्ञों के प्रोत्साहन हेतु देष का प्रथम राजकीय सम्मान ''धन्वतंरी सम्मान'' की स्थापना की। इसी प्रकार उन्होंने राज्य के सभी जिला अस्पतालों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में एक ही छत के नीचे एैलोपैथिक एवं आयुर्वेद चिकित्सा पध्दति की उपलब्धता भी सुनिष्चित की है, यह डॉ. रमन सिंह की मातृसंस्था एवं आयुर्वेद के प्रति निष्ठा तथा जागरूकता को रेंखांकित करती है। मुख्यमंत्री के निर्देषन में शाासन द्वारा छत्तीसगढ़ को हर्बल राज्य के रूप में स्थापित करने हेतु कार्य योजनाएं बनाई जा रही है जिसके तहत व्यापक स्तर पर वनौशधियों का रोपण, उत्पादन एवं विपणन की योजनाओं को साकार रूप प्रदान किया जा रहा है, वनौषधियों के निर्माण हेतु दीर्घकालीन योजनाऐं बनाई जा रही है, मुख्यमंत्री प्रदेष में उच्च गुणवक्तायुक्त आयुर्वेद औशधियों के निर्माण हेतु राज्य में विष्वस्तरीय आयुर्वेद फार्मेसी के स्थापना हेतु प्रयासषील है इस हेतु वे देष के अग्रणी औशधि निर्माता कम्पनीयों को राज्य में ईकाईयां स्थापित करने हेतु उन्हें आमंत्रित कर चुके हैं। देष के ख्यातिलब्ध आयुर्वेद एवं योग मर्मज्ञ बाबा रामदेव को भी उन्होंने छ.ग. में आयुर्वेद चिकित्सा केन्द्र की स्थापना हेतु आग्रह किया है। आयुर्वेद षिक्षा के विकास में भी उनके सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है आयुर्वेद महाविद्यालय रायपुर को स्तकोत्तर महाविद्यालय का दर्जा प्राप्त हो चुका है, राज्य के परम्परागत वैद्यों का सूचीकरण किया जा रहा है ताकि इन वैद्यों के पास संधारित ज्ञान का वैज्ञानिक शोध एवं विष्लेषण हो सके।
महाविद्यालय में डॉ. रमन सिंह के अनेक सहपाठी जिसमें प्राचार्य डॉ. डी. के. तिवारी, डॉ. सुरेन्द्रषर्मा, डॉ. बसंत शार्मा, डॉ. जी.सी.जैन, डॉ. जोगेष अरोरा, डॉ. श्रीमती लीला पाण्डेय, आदि कार्यरत है, जो सदैव डॉ. रमन सिंह के छात्र जीवन की सहजता सरलता एवं सौम्यता का संस्मरण सुनाते रहते है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जब भी विभागीय अथवा सार्वजनिक समारोह में अपने इन सहपाठियों से मिलते है, वे पूर्णरूपेण अनौपचारिक हो जाते है तथा अपने सहपाठियों के गलबाहियाँ डालकर उनसे पूर्ण आत्मीयता के साथ मिलते है तथा अपने सहपाठियों का नाम लेकर उन्हें संबोधित करते है, विभिन्न समारोह के समापन पष्चात् मंच से उतरकर वे अपने साथियों से हाथ मिलाते हुए सहजता के साथ मिलते है।
महाविद्यालय परिवार भगवान धन्वंतरी का नतमस्तक है जिनका आर्षिवाद डॉ. रमनसिंह को चिकित्सकीय जीवन एवं राजनीतिक जीवन मे सतत प्राप्त होता रहा है, उनके आर्षिवाद का ही प्रतिफल है कि आयुर्वेद सपूत डॉ. रमन सिंह देष के सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री के रूप में नवाजे गए, डॉ. रमन के दूरदर्षी सोच का ही परिणाम है की उनके द्वारा शाोभित कई जनकल्याणकारी योजनाओं को भाजपा एवं विपक्षी दलों द्वारा केन्द्र एवं राज्य सरकारों में लागू किया गया है, तथा डॉ. रमन के नीतियों को बिना भेदभाव अंगीकृत किया गया है। छत्तीसगढ़ की जनता ने आयुर्वेद सपूत डॉ. रमन के नेतृत्व पर पूर्ण विष्वास व्यक्त करते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में दूसरी पारी सौपी है, आयुर्वेद समुदाय छत्तीसगढ़ के जनता के प्रति आभारी है।
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